80 से अधिक प्रधानाचार्यों और जिला कार्यकारिणी ने मेजर हरिश्चंद्र सिंह को अवैतनिक सचिव बनाने की अनुशंसा की; स्काउट भवन बंद होने और प्रशिक्षण बाधित होने पर जताई नाराजगी
रायबरेली। जनपद में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने तथा लंबे समय से रिक्त पड़े सचिव पद पर नियमित नियुक्ति की मांग तेज हो गई है। जिले के 80 से अधिक प्रधानाचार्यों, प्रधानाचार्याओं और जिला कार्यकारिणी के सदस्यों ने संस्था के विधान के अनुसार स्थानीय स्तर पर सचिव नियुक्त किए जाने की मांग उठाई है। इस संबंध में सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य मेजर हरिश्चंद्र सिंह को अवैतनिक सचिव नियुक्त करने की अनुशंसा भी की गई है।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि स्काउट-गाइड विद्यार्थियों में अनुशासन, सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने वाली महत्वपूर्ण गतिविधि है। इसके बावजूद जनपद में प्रशिक्षण एवं अन्य कार्यक्रमों के बाधित होने से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तीन वर्षों से गतिविधियां प्रभावित होने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद में स्काउट-गाइड संगठन की गतिविधियां पूर्व में प्रदेश और देश स्तर पर अपनी पहचान रखती थीं। जिले में लीडर ट्रेनर और सहायक लीडर ट्रेनरों की अच्छी संख्या थी। हालांकि, पिछले तीन वर्षों से संगठन की गतिविधियां प्रभावित होने और स्काउट भवन बंद रहने की शिकायतें सामने आई हैं।
कार्यकारिणी के सदस्यों का आरोप है कि जिला स्तर पर जिम्मेदार पदाधिकारियों की नियमित बैठकें नहीं होने और प्रशासनिक सहयोग की कमी के कारण प्रशिक्षण कार्यक्रम ठप हो गए हैं। उनका कहना है कि स्काउट भवन की देखरेख और गतिविधियों के संचालन के लिए स्थायी व्यवस्था की आवश्यकता है।
27 सितंबर की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव
मामले में 27 सितंबर 2026 को वैदिक इंटर कॉलेज, रायबरेली में बैठक आयोजित की गई थी। इसमें जिला स्काउट कमिश्नर, जिला गाइड कमिश्नर, जिला सहायक कमिश्नर स्काउट्स, जिला सहायक कमिश्नर गाइड्स सहित संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मेजर हरिश्चंद्र सिंह को अवैतनिक सचिव नियुक्त किए जाने की अनुशंसा की।
मेजर हरिश्चंद्र सिंह इंटर कॉलेज गौरा के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हैं। कार्यकारिणी के सदस्यों का कहना है कि वह सेवा भावना के साथ संगठन को पर्याप्त समय देने के लिए तैयार हैं। उनका उद्देश्य जिले में स्काउटिंग-गाइडिंग की गतिविधियों को दोबारा सक्रिय करना और विद्यार्थियों के प्रशिक्षण को नियमित कराना है।
80 से अधिक प्रधानाचार्यों ने अधिकारियों से की मांग
जनपद के राजकीय इंटर कॉलेज, राजकीय हाईस्कूल, सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन विद्यालयों तथा सीबीएसई विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रधानाचार्याओं ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रधानाचार्यों ने आश्वासन दिया है कि सक्षम अधिकारियों के मार्गदर्शन में स्काउट-गाइड की गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करने में पूरा सहयोग दिया जाएगा। कार्यकारिणी के सदस्यों का कहना है कि व्यापक समर्थन के बावजूद सचिव पद पर नियुक्ति नहीं होने से संगठन का काम प्रभावित हो रहा है।
स्काउट भवन बंद रहने पर भी उठे सवाल
संगठन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि 2 अक्टूबर को स्काउट भवन में ताला बंद होने के कारण राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और सर्वधर्म प्रार्थना जैसे कार्यक्रमों का विधिवत आयोजन नहीं हो सका। इस स्थिति को लेकर सदस्यों ने चिंता जताई है और भवन को नियमित रूप से खोले जाने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो राज्य पुरस्कार और राष्ट्रपति पुरस्कार की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। प्रशिक्षण में आ रही बाधाओं से नाराज कुछ स्काउट-गाइड विद्यार्थियों के धरना-प्रदर्शन की योजना बनाने की भी जानकारी सामने आई है।
प्रदेश मुख्यालय की भूमिका पर भी सवाल
कार्यकारिणी के कुछ सदस्यों ने प्रदेश मुख्यालय द्वारा प्रादेशिक संगठन आयुक्त नौशाद अली को रायबरेली में सचिव का कार्य देखने की जिम्मेदारी दिए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि स्थानीय संस्था के विधान और कार्यकारिणी की अनुशंसा के अनुरूप ही सचिव की नियुक्ति की जानी चाहिए।
साथ ही, संस्था के बैंक खाते और धनराशि के उपयोग को लेकर भी कुछ सदस्यों ने आशंकाएं व्यक्त की हैं। इन आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में प्रदेश मुख्यालय और संबंधित पदाधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
अब प्रशासनिक निर्णय का इंतजार
जिला कार्यकारिणी और प्रधानाचार्यों की मांग है कि संस्था के विधान एवं लागू नियमों के अनुसार सचिव पद पर शीघ्र निर्णय लिया जाए, स्काउट भवन नियमित रूप से खोला जाए और प्रशिक्षण गतिविधियां पुनः शुरू कराई जाएं।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, जिले के स्काउट-गाइड विद्यार्थियों, शिक्षकों और संगठन के सदस्यों को नियमित प्रशिक्षण और सुचारु व्यवस्था बहाल होने का इंतजार है।
