रायबरेली। पुलिस का मानवीय चेहरा: अनाथ बच्चों के लिए बने ‘खाकी’ वाले फरिश्ते
रायबरेली जनपद के डीह थाना क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने खाकी के प्रति जनमानस के नजरिए को गर्व से भर दिया है। जहाँ आमतौर पर पुलिस अपराधियों पर नकेल कसने के लिए जानी जाती है, वहीं रायबरेली पुलिस ने डीह थाना क्षेत्र के पूरे दुबे (मजरे लोधवारी) गाँव में चार मासूम अनाथ बच्चों का अभिभावक बनकर संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश की है।
दुखों का पहाड़ और पुलिस की पहल
इन मासूम बच्चों की कहानी अत्यंत हृदयविदारक है। महज एक वर्ष पूर्व बच्चों के सिर से माँ का साया उठ गया था, और अभी उस गम से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि दो दिन पूर्व पिता की मृत्यु ने इन चार छोटे बच्चों को पूरी तरह अनाथ कर दिया। सिर पर न छत रही और न ही भविष्य का कोई सहारा।
जब यह सूचना पुलिस प्रशासन तक पहुँची, तो सीओ सलोन और डीह थाना प्रभारी ने संवेदनहीनता दिखाने के बजाय तुरंत मौके पर पहुँचने का निर्णय लिया। पुलिस ने केवल ढांढस ही नहीं बँधाया, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए ‘नींव’ का शुभारंभ पूरे विधि-विधान के साथ किया।
शिक्षा और संरक्षण का लिया जिम्मा
बच्चों के रहने, खाने-पीने और सबसे महत्वपूर्ण—उनकी शिक्षा में कोई बाधा न आए, इसके लिए पुलिस ने तत्काल ठोस व्यवस्थाएं कीं। रायबरेली पुलिस अब इन बच्चों के लिए एक अभिभावक की भूमिका निभा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि:
* बच्चों को हर संभव आर्थिक और सामाजिक मदद दी जाएगी।
* उनकी पढ़ाई का खर्च और रहने की समुचित व्यवस्था पुलिस की निगरानी में होगी।
* गाँव के स्तर पर भी उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की गई है।
समाज के लिए एक संदेश
इस पहल की पूरे जनपद में प्रशंसा हो रही है। पुलिस का यह कदम यह साबित करता है कि वर्दी के पीछे भी एक भावुक हृदय होता है!!!

By RAKESH KUMAR

EDITER IN CHIEF RAKESH KUMAR SUPER INDIA NEWS TV Mo: 9140210037

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