महराजगंज/रायबरेली: तहसील क्षेत्र के राजस्व गांव सिकंदरपुर में भूमि गाटा संख्या 1633 पर 2 मार्च 2022 को शुरू हुआ भूमि विवाद मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आरोप है कि, विपक्षियों राम तीरथ आदि के द्वारा कई बार सीमांकन करने मौके पर गई राजस्व और पुलिस टीम के साथ अभद्रता करते हुए नापने वाला फीता छीन कर तोड़ देने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया। बावजूद 2022 से 2025 तक, इन 3 सालों में भूमि विवाद का यह मामला अभी तक अनसुलझा ही है, जिसके लिए सुनियोजित तरीके से समय-समय पर विवाद उत्पन्न करने तथा एक पक्ष की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मामले में प्रशासन द्वारा कोर्ट के आदेश पर मौके पर दोनों पक्षों द्वारा धारा 44 के अंतर्गत दायर किए गए मुकदमे के आधार पर मौके पर जाकर सीमांकन करते हुए दोनों पक्षों की भूमि गाटा संख्या 1632 और 1633 चिन्हित करते हुए पथरगढ़ी करवा दी गई है।
आपको बता दें कि, राजस्व गांव सिकंदरपुर में स्थित भूमि गाटा संख्या 1633 जोकि सूर्यभान सिंह पुत्र स्वर्गीय रामस्वरूप सिंह के नाम राजस्व भू अभिलेख में दर्ज थी, इस जमीन का गांव के ही रहने वाले वासुदेव सिंह पुत्र रामसुंदर सिंह ने बैनामा लेकर बराबर की जमीन सूर्यभान सिंह को अपनी बाग में उन्हें भी बैनामा कर दिया गया। इसी गाटा संख्या की जमीन पर अपना अधिकार बताते हुए गांव के ही रहने वाले विपक्षी राम तीरथ पुत्र छंगालाल, इनकी मां चमेला और पत्नी अरुणा देवी आदि द्वारा धारा 44 के अंतर्गत भूमि गाटा संख्या 1632 के सीमांकन हेतु अदालत में एक वाद दायर किया गया था। उधर सूर्यभान सिंह के द्वारा भी अपने गाटा संख्या 1633 की भूमि पैमाइश के लिए धारा 44 के अंतर्गत वाद दायर किया गया था। 14 अगस्त 2022 को राजस्व टीम के तत्कालीन कानून को श्रीकांत पांडेय के नेतृत्व वाली टीम द्वारा जब मौके पर जाकर सीमांकन किया गया, तो गाटा संख्या 1633 के 0.0507 हैक्टेयर पर विपक्षी राम तीरथ पुत्र छंगालाल आदि का कब्जा पाया गया, जो वादग्रस्त भूखंड का अंश है।
मौके पर सीमांकन करने गई राजस्व टीम ने बाकायदा पथरगढ़ी भी करवाया, किंतु आरोप है कि, राजस्व टीम के सामने ही विपक्षी आमादा फौजदारी होकर गाली गलौज करते हुए राजस्व टीम द्वारा कराई गई पथरगढ़ी उखाड़ कर फेंक दी गई।
दूसरी तरफ विपक्षी रामतीर्थ द्वारा अदालत में धारा 44 के अंतर्गत हदबरारी मुकदमा के तहत राजस्व अधिकारियों ने सिकंदरपुर गांव स्थित भूमि गाटा संख्या 1632 की पैमाइश कर विपक्षियों की भी भूमि की माप कर चिन्हांकित करवा दी गई। यहीं दोनों पक्षों का विवाद समाप्त हो गया।
बताते हैं कि, इस दौरान बकौल प्रदीप सिंह, राम तीरथ ने दो लाख रुपए की मांग करी, जब उन्होंने रुपए देने से मना कर दिया तो राम तीरथ ने योजना बद्ध तरीके से बबलू सिंह और उनके पिता वासुदेव सिंह के विरोधियों के साथ मिलकर झूठा, खड्यंत्र भूमि विवाद का रच कर परेशान करने की ठान लिया, जिससे वादी पक्ष वासुदेव सिंह और बबलू सिंह का सामाजिक छवि धूमिल हो रही है।
इस भूमि विवाद मामले में सूर्यभान सिंह द्वारा दी गई लिखित शिकायती पत्र का संज्ञान लेकर 12 जून 2025 को मौजूदा एसडीम सचिन यादव के आदेश पर एक बार फिर राजस्व और पुलिस टीमें गठित कर मौके पर पहुंची और पैमाइश कर पुनः पथरगढ़ी करवाई गई।
